नई दिल्ली, 26 सितंबर 2026 - भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के विभिन्न संस्थानों ने स्वच्छता और टिकाऊ कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य न केवल कृषि अनुसंधान में सुधार लाना है, बल्कि पर्यावरण की रक्षा करना और ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर को भी ऊंचा उठाना है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए, आईसीएआर के अध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि यह कदम भारत के सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कृषि क्षेत्र में कचरे का प्रबंधन एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। भारत में, कृषि उत्पादन से उत्पन्न होने वाला कचरा अक्सर जलवायु परिवर्तन और भूमि की गुणवत्ता में गिरावट का कारण बनता है। आईसीएआर की नई पहल के तहत, विभिन्न संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने कचरे के प्रबंधन के लिए नवीनतम तकनीकों का उपयोग करें, जैसे कि जैविक अपशिष्ट का पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग।
डॉ. कुमार ने बताया कि इस पहल के तहत, आईसीएआर संस्थानों को स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसका उद्देश्य न केवल कचरे के प्रबंधन में सुधार करना है, बल्कि ग्रामीण समुदायों को भी सशक्त बनाना है। इससे न केवल पर्यावरण की स्थिति में सुधार होगा, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले विभिन्न संस्थानों ने पहले ही अपने कचरे के प्रबंधन के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। उदाहरण के लिए, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने जैविक अपशिष्ट को खाद में बदलने के लिए एक नई तकनीक विकसित की है। यह तकनीक न केवल कचरे को कम करने में मदद करेगी, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार लाएगी।
इसके अतिरिक्त, आईसीएआर ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सभी संस्थान इस पहल के तहत कचरे के प्रबंधन के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित करें। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी संस्थान अपने लक्ष्यों को समय पर पूरा कर सकें।
इस पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह किसानों को जागरूक करने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा। आईसीएआर ने विभिन्न कार्यशालाओं और सेमिनारों का आयोजन करने की योजना बनाई है, जिसमें किसानों को कचरे के प्रबंधन के महत्व के बारे में बताया जाएगा।
कुल मिलाकर, आईसीएआर की यह पहल न केवल कृषि क्षेत्र में सुधार लाने का प्रयास है, बल्कि यह भारत के पर्यावरणीय लक्ष्यों को भी पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल के सफल कार्यान्वयन से न केवल कचरे का प्रबंधन बेहतर होगा, बल्कि यह ग्रामीण समुदायों के लिए भी एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित करेगा।
