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2026/09/27National Governance & Policy

अभ्यास तरंग शक्ति-2026: नौसेना की साझेदारी-दृष्टि का नया संकेत

भारत ने अभ्यास तरंग शक्ति-2026 के जरिए समुद्री सुरक्षा में ‘साझेदारी में शक्ति’ की अपनी नीति को फिर से रेखांकित किया है। यह अभ्यास केवल सैन्य समन्वय का प्रदर्शन नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत में नियम-आधारित व्यवस्था, अंतर-संचालन क्षमता और रणनीतिक भरोसे को मजबूत करने का संकेत भी है।

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National Governance & Policy Desk

New Delhi, India Just now (12:17 AM IST)•5 min read
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"अभ्यास तरंग शक्ति-2026: नौसेना की साझेदारी-दृष्टि का नया संकेत"

भारत ने अभ्यास तरंग शक्ति-2026 के जरिए समुद्री सुरक्षा में ‘साझेदारी में शक्ति’ की अपनी नीति को फिर से रेखांकित किया है। यह अभ्यास केवल सैन्य समन्वय का प्रदर्शन नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत में नियम-आधारित व्यवस्था, अंतर-संचालन क्षमता और रणनीतिक भरोसे को मजबूत करने का संकेत भी है।

भारत ने अभ्यास तरंग शक्ति-2026 को ऐसे समय में आगे बढ़ाया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री प्रतिस्पर्धा, आपूर्ति-श्रृंखला की संवेदनशीलता और सुरक्षा सहयोग की जरूरतें एक साथ बढ़ रही हैं। 'साझेदारी में शक्ति' की थीम इस बात का स्पष्ट संकेत देती है कि नई दिल्ली अब समुद्री सुरक्षा को केवल राष्ट्रीय रक्षा के दायरे में नहीं, बल्कि साझेदार देशों के साथ साझा जिम्मेदारी के रूप में देख रही है। यह दृष्टिकोण भारत की उस व्यापक रणनीति से मेल खाता है जिसमें नौसैनिक क्षमता, कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता को एक ही फ्रेम में रखा जा रहा है।

साझेदारी का नया फ्रेम

अभ्यास तरंग शक्ति-2026 का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसका प्रतीकात्मक और व्यावहारिक, दोनों स्तरों पर महत्व है। समुद्री अभ्यासों में अब केवल जहाजों, विमानों और प्लेटफॉर्मों की उपस्थिति पर्याप्त नहीं मानी जाती; असली कसौटी यह है कि अलग-अलग सेनाएं, संचार प्रणालियां और परिचालन प्रक्रियाएं कितनी सहजता से एक-दूसरे के साथ काम कर सकती हैं। इसी संदर्भ में 'साझेदारी में शक्ति' का संदेश भारत की समुद्री कूटनीति को एक नई भाषा देता है—ऐसी भाषा जो शक्ति प्रदर्शन से अधिक सामूहिक तैयारी पर जोर देती है।

यह अभ्यास भारत की उस दीर्घकालिक नीति का विस्तार है जिसमें नौसेना को क्षेत्रीय सार्वजनिक-हित के साधन के रूप में पेश किया जाता है। समुद्री डकैती, अवैध तस्करी, मानवीय सहायता, आपदा राहत और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दे किसी एक देश की क्षमता से हल नहीं होते। अभ्यास तरंग शक्ति-2026 इस वास्तविकता को संस्थागत रूप देने की कोशिश है। इससे भारत यह संदेश भी देता है कि वह हिंद-प्रशांत में सुरक्षा प्रदाता की भूमिका निभाने को तैयार है, लेकिन साझेदारों के साथ समानता और परस्पर सम्मान के आधार पर।

रणनीतिक संकेत

इस तरह के अभ्यासों का महत्व केवल सैन्य तत्परता तक सीमित नहीं रहता। वे राजनीतिक संकेत भी भेजते हैं। एक ओर, वे सहयोगी देशों को भरोसा देते हैं कि भारत क्षेत्रीय स्थिरता में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। दूसरी ओर, वे संभावित प्रतिद्वंद्वियों को यह संकेत देते हैं कि समुद्री क्षेत्र में किसी भी तरह की एकतरफा दबाव नीति का जवाब समन्वित और बहुपक्षीय ढांचे में दिया जा सकता है। यही कारण है कि ऐसे अभ्यासों को अक्सर व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ में देखा जाता है।

भारत के लिए यह अभ्यास उस समय और भी अहम हो जाता है जब समुद्री मार्गों की सुरक्षा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक बनी हुई है। ऊर्जा आयात, व्यापारिक आवागमन और डिजिटल-समुद्री अवसंरचना—इन सबकी निर्भरता खुले और सुरक्षित समुद्री रास्तों पर है। अभ्यास तरंग शक्ति-2026 इस निर्भरता को सुरक्षा-नीति के केंद्र में लाता है और यह रेखांकित करता है कि समुद्री स्थिरता अब केवल नौसैनिक मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक अनिवार्यता है।

हिंद-प्रशांत गणना

हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका पिछले एक दशक में लगातार बदली है। पहले जहां जोर तटीय रक्षा और क्षेत्रीय उपस्थिति पर था, वहीं अब फोकस अंतर-संचालन, साझेदारी और साझा अभ्यास-आधारित तैयारी पर है। तरंग शक्ति-2026 इसी बदलाव की निरंतरता है। यह भारत को एक ऐसे देश के रूप में स्थापित करता है जो न केवल अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा कर सकता है, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा वास्तुकला में योगदान भी दे सकता है।

नीतिगत दृष्टि से देखें तो यह अभ्यास भारत की 'सागर' और 'एक्ट ईस्ट' जैसी अवधारणाओं के साथ भी जुड़ता है, जिनमें समुद्री सहयोग, संपर्क और क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता दी गई है। 'साझेदारी में शक्ति' का नारा इस बात को और स्पष्ट करता है कि भारत अब समुद्री शक्ति को अलग-थलग क्षमता नहीं, बल्कि नेटवर्क्ड सुरक्षा के रूप में परिभाषित कर रहा है। यह बदलाव केवल सैन्य अभ्यासों में नहीं, बल्कि विदेश नीति और रक्षा-प्रबंधन की समग्र सोच में दिखाई देता है।

अभ्यास तरंग शक्ति-2026 का व्यापक संदेश यही है कि समुद्र में शक्ति का अर्थ अब अकेले आगे बढ़ना नहीं, बल्कि साथ मिलकर तैयार रहना है। भारत इस मंच के जरिए यह दिखा रहा है कि उसकी नौसैनिक रणनीति केवल जहाजों की संख्या या हथियारों की क्षमता पर नहीं, बल्कि भरोसे, तालमेल और साझा उद्देश्य पर आधारित है। यही इस अभ्यास की सबसे बड़ी राजनीतिक और रणनीतिक उपलब्धि है।

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